दोष मेरा नहीं, जवानी का है- Antarvasna

मैं घूमने के लिए शिमला जा रहा था मुझे अकेले ही घूमने का शौक है मैंने दिल्ली से बस लिया और मैं शिमला के लिए निकल पड़ा मैं जिस सीट पर बैठा था उसी सीट में एक लड़की बैठी हुई थी मैंने उसे कहा मेरी विंडो वाली सीट है तो वह कहने लगी आप यहां बैठ जाइए मैंने उसे कहा कोई बात नहीं।

मैं उसके बगल में बैठ गया हम दोनों ने एक दूसरे से हाथ मिलाया मैंने उसे अपना परिचय दिया उसने भी मुझे अपना नाम बताया उसका नाम आकांक्षा है मैंने उसे कहा मेरा नाम राहुल है। वह मुझे कहने लगी आप क्या शिमला घूमने के लिए जा रहे हैं तो मैंने उसे बताया हां मैं शिमला घूमने जा रहा हूं मैंने उसे कहा दरअसल मुझे फोटोग्राफी का बहुत शौक है और मैं उसी के लिए शिमला जा रहा हूं। वह मुझे कहने लगी चलिए यह तो बहुत अच्छी बात है मैं भी शिमला अपने किसी प्रोजेक्ट के सिलसिले में जा रही हूं, वह अपने कॉलेज के किसी प्रोजेक्ट के सिलसिले में वहां जा रही थी।

मैंने उससे पूछा कि आप क्या कर रही हैं तो वह कहने लगी मैं पीएचडी कर रही हूं और अपने किसी प्रोजेक्ट के सिलसिले में कुछ दिनों के लिए शिमला जा रही हूं। मैंने उससे कहा आप तो काफी पढ़ी-लिखी नजर आती हैं उसने मुझसे पूछा तुम्हें कैसे पता कि मैं पढ़ी-लिखी नजर आती हूं तो मैंने उसे बताया आपके चेहरे को देखकर ही लगता है कि आप बहुत पढ़ाकू किस्म के है वह मुझे देख कर हंसने लगी और कहने लगी लगता है तुम मेरा मजाक बना रहे हो।

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बस चलने वाली थी मैंने आकांशा से पूछा कि आप कुछ लेंगे तो वह कहने लगी नहीं मैंने अपना सारा सामान रखा हुआ है लेकिन मैं बस से उतरा और मैंने कोल्ड्रिंक ली मैंने आकांक्षा को भी पूछा कि आप लेंगे तो उसने मना कर दिया। बस चल रही थी और हम दोनों के बीच बड़ी अच्छी बातें होती जा रही थी हम दोनों एक दूसरे की बातों से बहुत खुश थे मुझे तो अंदाजा भी नहीं था कि मेरे और आकांक्षा के बीच में दोस्ती हो जाएगी।

आकांक्षा बड़े खुले विचारों की है और वह मुझसे बहुत खुलकर बात करती है उसने मुझे अपने पापा और मम्मी की तस्वीर दिखाई और वह कहने लगी मैं घर में इकलौती हूं और मेरे पापा कॉलेज में प्रोफेसर है उन्होंने मुझे कभी भी किसी चीज के लिए नहीं रोका मैंने आज तक अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जी है।

मैंने आकांक्षा से कहा लगता है तुम्हारे पापा भी मेरे पापा की तरह ही हैं हालांकि मेरे पापा एक बिजनेसमैन है परंतु उन्होंने मुझे आज तक कभी भी मेरे किसी फैसले या फिर मैंने जो चाहा उन्होंने मुझे कभी नहीं रोका। हम लोग शिमला पहुंच गए थे जब मैं शिमला की वादियों में पहुंचा तो मैंने बस से उतरते ही एक फोटो ली मैंने कहा मैं तुम्हारी फोटो लेना चाहता हूं।

मैंने आकांशा की फोटो ली वह कहने लगी ठीक है राहुल दोबारा मिलेंगे मैंने कहा लेकिन तुम अपना नंबर तो मुझे दे जाओ वह मुझे कहने लगी अरे सॉरी मुझे तो ध्यान ही नहीं रहा कि मुझे तुमसे तुम्हारा नंबर लेना चाहिए था। आकांशा ने मुझे अपना नंबर दे दिया और मैं फिर शिमला में एंजॉय करने लगा मैं अपनी फोटोग्राफी को पूरा एंजॉय कर रहा था।

मैं जिस होटल में रुका था वहां पर भी मैंने मैनेजर से काफी अच्छी बातचीत बना ली थी मैनेजर भी खुश थे और वह कहने लगे कि सर आप तो बड़े अच्छे हैं। मैं शिमला में काफी दिन रुकने वाला था इसलिए मैंने एक होटल बुक कर लिया था जिससे कि मुझे कोई दिक्कत ना हो। मैं और आकांक्षा उस दिन तो नहीं मिले लेकिन एक दिन आकांक्षा का मुझे फोन आया जब मुझे आकांक्षा का फोन आया तो आकांशा मुझसे कहने लगी तुम मुझे भूल ही गए।

मैंने आकांक्षा से कहा मैं दरअसल अपने फोटोग्राफी में इतना बिजी हो गया था कि मुझे समय ही नहीं मिल पाया आकांक्षा मुझे कहने लगी चलो कोई बात नहीं आज हम लोग मिलते हैं। शाम को हम लोग मिले, शाम बड़ी ही मस्त थी उस दिन तारे भी बहुत चमक रहे थे मौसम भी काफी अच्छा था लेकिन थोड़ी बहुत ठंड हो रही थी।

मैं जब आकांक्षा से मिला तो मैंने आकांक्षा से कहा यार तुम्हें मिलकर तो मुझे बहुत अच्छा लगा इतने दिनों बाद हम लोग मिल रहे हैं आकांक्षा ने मुझसे पूछा तुम्हारी फोटोग्राफी कैसी चल रही है और तुम शिमला में एंजॉय तो कर रहे हो। मैंने उसे कहा हां मैं तो पूरा इंजॉय कर रहा हूं लेकिन क्या तुम्हारा प्रोजेक्ट पूरा हुआ वह कहने लगी नहीं अभी तो नहीं हुआ लेकिन कुछ समय बाद हो जाएगा और मैं उसके बाद दिल्ली निकल जाऊंगी।

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मैंने उसे कहा चलो कोई बात नहीं मैं तुमसे दिल्ली में भी मिल लूंगा हालांकि मैं मुंबई में रहता हूं लेकिन मेरी आकांशा के साथ बहुत अच्छी दोस्ती हो चुकी थी और उस दिन हम दोनों ने काफी अच्छा समय बिताया। कुछ समय बाद आकांशा दिल्ली जा चुकी थी और मैं मुंबई चला गया था लेकिन मेरी बातचीत अभी भी आकांक्षा से होती रहती थी हम दोनों के बीच बहुत अच्छी दोस्ती हो चुकी थी और हम दोनों एक दूसरे से भी संपर्क में थे।

एक दिन आकांक्षा ने मुझे कहा मैं मुंबई अपने दीदी के पास आ रही हूं मुझे नहीं मालूम था कि उसकी दीदी मुंबई में रहती है और शायद आकांक्षा का कोई भी दोस्त मुंबई में नहीं था इसलिए उसने मुझसे मिलने की सोची। मैंने आकांक्षा से पूछा तुम कब दिल्ली से मुंबई आओगी वह कहने लगी मैं दो दिन बाद यहां से निकलूंगी दो दिन बाद मेरी फ्लाइट है।

मैंने कहा चलो ठीक है हम लोग मुंबई में मिलते हैं मैंने आकांक्षा को कहा तुम मुझे फोन कर देना आकांक्षा कहने लगी ठीक है मैं मुंबई पहुंच जाऊंगी तो तुम्हें फोन कर दूंगी। दो दिन बाद आकांशा अपनी दीदी के पास आ चुकी थी आकांक्षा ने मुझे फोन किया तो मैं अपनी कार लेकर आकांशा से मिलने के लिए चला गया लेकिन ट्रैफिक इतना ज्यादा था कि आकांक्षा को मेरा इंतजार करना पड़ा।

वह मुझे कहने लगी मुझे तो तुम्हारा काफी देर से इंतजार करना पड़ा मैंने आकांक्षा से कहा सॉरी मैं तो घर से जल्दी निकल चुका था लेकिन मुंबई में ट्रैफिक इतना ज्यादा है कि आने में देरी हो गयी। आकांक्षा ने कहा कोई बात नहीं आकांक्षा मुझे कहने लगी तुम मुझे कहां लेकर जाओगे मैंने आकांक्षा से कहा मैं तुम्हें मुंबई में पाव भाजी खिलाऊंगा फिट मैं उसे एक स्टॉल पर ले गया वहां पर हम दोनों ने पाव भाजी खाई। आकांक्षा कहने लगी पाव भाजी खा कर तो मजा आ गया।

आकांक्षा का नेचर बिल्कुल मेरी तरह ही है वह बहुत ही ज्यादा शांत स्वभाव की है और उसे कभी भी गुस्सा नहीं आता मुझे उससे बात करके लगा की आकांक्षा बहुत ही अच्छी है और उसका नेचर बहुत ही अच्छा है। मैंने उस दिन आकांक्षा को उसके घर तक छोड़ दिया था और मैं वहां से अपने घर चला आया मैं वहां से अपने घर लौटा तब तक मुझे आकांक्षा का फोन आया वह कहने लगी तुम्हारी गाड़ी में मेरा पर्स रह गया है मैंने कहा मैं अभी देख लेता हूं।

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मैंने जब अपनी कार में देखा तो आकांक्षा का पर्स मेरे पास ही रह गया था मैंने आकांक्षा को फोन किया और कहा तुम्हारा पर्स मेरे घर में ही रह गया है मैं तुम्हें कल लौटा दूंगा। वह कहने लगी कोई बात नहीं तुम कल मुझे लौटा देना, मेरी बात आकांशा से आधे घंटे तक हुई मैंने जैसे ही फोन रखा तो मेरी मम्मी ने मुझे पकड़ लिया वह कहने लगी तुम किस से बात कर रहे हो। मैंने जब आकांक्षा के बारे में मम्मी को बताया तो मम्मी कहने लगी कल तुम आकांक्षा को घर पर लेकर आना मैंने मम्मी से कहा ठीक है मैं आकांक्षा को कल घर पर ले आऊंगा।

अगले दिन मैंने आकांक्षा को कहा तुम मेरे साथ घर पर चलो। आकांक्षा मेरे साथ घर पर आ गई और जब वह मेरे साथ घर आई तो वह मेरी मम्मी से मिलकर बहुत खुश थी वह मेरी मम्मी के साथ बड़े अच्छे से बात कर रही थी। अंकाक्षा मेरी मम्मी से बात करती तो मैं उसे देख रहा था और जब वह मेरे रूम में आई तो वह मुझसे पूछने लगी तुम्हारा रूम तो बहुत अच्छा है। मैंने जब उसे अपने फोटोग्राफ्स दिखाई तो वह कहने लगी तुमने तो बड़ी अच्छी फोटो खींची है।

मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं आकांक्षा के साथ बैठकर उससे बात कर रहा था लेकिन आकांक्षा के स्तन मुझे दिखाई दे रहे थे और उसके गोरा स्तन देख कर मैं उत्तेजित हो गया मैं अपने आप पर काबू नहीं रख सका। मैंने उसके स्तनों के अंदर हाथ डाल दिया शायद वह भी अपनी जवानी पर काबू ना रख सकी और बिस्तर पर लेट गई बिस्तर पर लेटते ही मैंने उसके स्तनों का रसपान करना शुरू किया और उसके होठों को मैंने चूसना शुरू किया।

मैं उसके होठों को बड़े अच्छे से चूसता और जब मैंने उसे नंगा किया तो मैंने उसकी योनि का भी बहुत देर तक चाटने का मजा लिया उसकी योनि को मुझे चाटने मे अच्छा लगा। मैंने जैसे ही अपने लंड को अंकाक्षा की योनि में प्रवेश करवाया तो वह चिल्लाने लगी। मैं बड़ी तेजी से उसे धक्के देने लगा मैं उसकी योनि के अंदर अपने लंड को बड़ी तेज से डालता वह मेरा साथ बड़े अच्छे से देती।

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मैंने जब देखा कि उसकी योनि से खून आ रहा है तो मुझे और भी मजा आने लगा मैंने बहुत तेज गति से उसे धक्के दिए। वह मुझे कहने लगी तुमने तो मेरी चूत का बुरा हाल कर दिया वह अपने पैरों को खोलने लगी वह अपने मुंह से सिसकिया लेने लगी। उसकी तेज सिसकियो से मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पा रहा था लेकिन मैंने उसकी चूत उस दिन बहुत देर तक मारी। जब 5 मिनट बाद मेरा वीर्य गिर गया तो वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लगा।

आकांक्षा जितने दिनों तक मुंबई में थी उतने दिनों तक हम दोनों हमेशा मिलते रहे और हम दोनों मिलकर एक दूसरे के साथ सेक्स किया करते। आकांक्षा मुंबई से जा चुकी है लेकिन अब भी मेरी उससे फोन पर बात होती है और वह मुझे अपनी नंगी तस्वीरें भेजते रहती है वह हमेशा मुझे उत्तेजित करने की कोशिश करती है। हम दोनों के बीच फोन सेक्स तो होता ही रहता हैं और मुझे बहुत अच्छा भी लगता है हम दोनों एक दूसरे के साथ फोन सेक्स का मजा लेते हैं।

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