दोनों के लौड़े लग गए- Desi Bhabhi ki Chudai

हेलो फ्रेंड्स, मेरा नाम मनोज यादव (उम्र २१) है। मैं गोरखपुर का रहने वाला हूँ। वहाँ के हाईवे के पास हमारा एक ढाबा है, जहाँ पर सुबह-शाम यात्री आते हैं। पिताजी और मैं बाकी लोगों के साथ मिलकर ढाबा चलाते हैं।

अक्सर हमारे ढाबे पर कपल्स, परिवार आते हैं और तब मैं आए हुए लोगों में सुन्दर और सेक्सी भाभी की तलाश में रहता हूँ। मैंने ढाबे के लेडीज़ टॉयलेट में एक गुप्त कैमरा लगाया है, जिसकी मदत से मैं अंदर बैठी औरतें और भाभियों को हगते हुए और पेशाब करते हुए देखता हूँ।

एक बार रात के क़रीब ०८: ३० बजे हमारे ढाबे पर एक गाड़ी आकर रुकी थी। उसमें से एक पटाखा भाभी उतरी और उसके साथ दो आदमी। ढाबे में जितने भी मर्द थे वह सब उस भाभी को ही ताड़ रहे थे।

भाभी और वह २ आदमी आकर खाना खाने के लिए चारपाई पर बैठ गए। मैंने जाकर उनका आर्डर लिया था और तब मुझे पता चला कि भाभी अपने पति और पति के दोस्त के साथ आई थी।

तीनों ने कॉलेज में एक साथ पढ़ाई की होगी क्योंकि वह तीनों उस समय के बारे में बात कर रहे थे। मैंने हमारे ढाबे का लजीज खाना उन्हें परोसा और जाकर अपनी जग़ह पर खड़ा हो गया। मैं इंतज़ार करने लगा भाभी के टॉयलेट में जाने का।

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कुछ देर बाद, उन तीनों का खाना खाकर ख़तम हुआ और भाभी टॉयलेट की ओर बढ़ने लगी। मैं अपने मोबाइल फ़ोन की स्क्रीन पर बेचैन होकर देखने लगा था। भाभी लेडीज़ टॉइलेट में घुसी और अपनी साड़ी उठाने लगी।

उसने अपनी साड़ी उठाकर अपनी सफ़ेद पैंटी और चर्बीदार गाँड़ के दर्शन दे दिए। वह पैंटी को नीचे सरकाते हुए बैठ गई। उसके मोटे चूतड़ और गाँड़ की दरार देखकर मेरा लौड़ा तनकर मेरी चड्डी में खड़ा हो गया था।

पैरों के बल नीचे बैठकर भाभी ने पेशाब की तेज़ धार छोड़ना शुरू किया। पेशाब करने के बाद वह खड़ी हो गई और अपनी पैंटी पहनने लगी। तभी टॉयलेट का दरवाज़ा ख़ुला और मैंने देखा कि भाभी के साथ आया हुआ वह आदमी अंदर घुसा था।

मैंने जब ढाबे पर नज़र घुमाई, तब पता चला कि भाभी का पति तो बाहर खड़ा सिगरेट पी रहा था। वह आदमी भाभी की चूत में अपना हाथ रगड़ रहा था। भाभी उसकी चुम्मियाँ लेने लगी और फिर उसे जाने को कह दिया।

पहले वह आदमी आकर भाभी के पति के साथ बात करते हुए खड़ा हो गया और कुछ देर बाद, भाभी आकर उन दोनों के साथ शामिल हो गई। मैं उनकी बातें सुन रहा था। उनकी गाड़ी से आयल लीक हो रहा था, इसलिए वह एक मैकेनिक के बारे में मेरे पिताजी से पूछने लगे।

मेरे पिताजी ने उनको रास्ता बताया और फिर वह आदमी और भाभी का पति मैकेनिक को लाने के लिए चले गए। पहले तो वह आदमी न जाने के बहाने बना रहा था, लेकिन फिर भाभी के पति ने उसे ज़बरदस्ती अपने साथ लेकर गया।

भाभी गाड़ी में बैठे बोर हो गई थी, इसलिए वह ढाबे के इर्द-गिर्द ठहलने लगी। मैंने उस मौके का फ़ायदा उठाया और भाभी का पीछा करने लगा।

मैं भाभी के पास चला गया और उसे अपने मोबाइल में क़ैद हुए वीडियो दिखाकर अपनी चाल चली। वह वीडियो देखकर भाभी के चेहरे का रंग उड़ गया था। उसकी ऐसी गाँड़ फटी थी कि उसने धीरे-धीरे करके पाद मारना शुरू किया था।

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[मैं:] अभी इधर हगने मत बैठ जाना तुम। इतना ही दर था तो उसकी चुम्मियाँ क्यों ली तुमने?

[भाभी:] प्लीज़ मुझे जाने दो। मेरी पैंटी में शायद थोड़ी टट्टी निकल गई है। मुझे टॉयलेट जाकर देखने दो ज़रा।

मैं भाभी की चाल समझ गया था। वह साली भागना चाहती थी, लेकिन मैंने उसे पकड़कर पास वाले गोदाम में लेकर गया। वहाँ मैंने भाभी से साफ़-साफ़ कह दिया कि मेरे साथ एक बार चुदाई करलो और फिर चली जाना।

भाभी को बिना कुछ पूछे मैंने ज़मीन पर कपड़ा बिछाया दिया। मैंने भाभी को अपने बाहों में भरकर जकड़ लिया। उसकी मोटी चूचियों को अपनी छाती से दबाकर मैं उसके होंठों को चूसने लगा।

भाभी को मैंने उसकी उभरी हुई गाँड़ से पकड़कर उठा लिया और ज़मीन पर बिछाए कपड़े के ऊपर लेटा दिया। उसकी हरे रंग की साड़ी को उठाकर मैं उसकी मोटी जाँघों को चूमने लगा। वह भी गरम और मस्त होकर सिसकियाँ लेने लगी थी।

मैंने उसके पैर उठाकर उसकी झाँटों से भरी चूत को अच्छी तरह चाटना शुरू किया था। उसकी चूत की पँखुड़ियों को फ़ैलाकर मैं अपनी ज़ुबान को चूत के अंदर-बाहर करने लगा था। उसकी हल्की-हल्की चीख़ें निकलने लगी थी।

फिर मैंने भाभी का ब्लाउज़ खोल दिया और उसकी लटकती चूचियों को पकड़कर दबाने लगा। उसके काले निप्पल को बारी-बारी करके चूसकर उसे मैंने उत्तेजित कर दिया। भाभी की साड़ी और सफ़ेद रंग की पैंटी निकालकर मैंने उसे पूरा नंगा कर दिया।

मैंने पहले सोचा कि अपना लौड़ा भाभी के मुँह में डाल देता हुँ। लेकिन उसकी मुलायम और झाँटों से भरी चूत देखकर मेरा लौड़ा तनकर खड़ा हो गया था।

भाभी के पैरों को मैंने अपने कंधों पर रख दिया। अपने लौड़े को धीरे से धक्का मारकर झाँटों से भरी चूत के अंदर घुसाने के बाद, मैंने ठुकाई की रफ्तार धीरे से शुरू की और कुछ देर बाद बढ़ा दिया। भाभी चिल्ला-चिल्लाकर मज़े ले रही थी।

मैं भी उत्साहित होकर उसकी चूचियों को दबाने लगा। थोड़ी देर बाद, मैं भाभी के ऊपर लेटकर उसके होठों को चूसकर उसकी चुदाई करने लगा था। वह उत्साहित होकर चिल्ला रही थी।

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भाभी के मुँह से गरम साँसे निकलने लगी थी जो मुझे उकसा रही थी। मैंने उसके गले को पकड़कर सहारा लिया और अपने लौड़े को जोर-ज़ोर से उसकी झाँटों से भरी चूत पर पटकने लगा।

कुछ समय बाद, मैंने भाभी को मेरे ऊपर उल्टा लेटा दिया और उसकी गाँड़ की दरार को चाटने लगा। वह मेरे तनकर खड़े लौड़े को अच्छी तरह से चूस रही थी। उसने अपनी गाँड़ को मेरे मुँह पर रगड़ना शुरू कर दिया था।

मैंने भाभी की गाँड़ की छेद में अपनी ज़ुबान अंदर तक घुसाकर उसे चाटने लगा। साथ ही साथ, मैं अपनी उँगलियों से उसकी झाँटों से भरी चूत को भी रगड़ रहा था। भाभी अपने पैरों के बल उछलकर अपनी गाँड़ मेरे मुँह पर पटक रही थी।

मेरे लौड़े को हिलाते हुए भाभी ने अपनी गाँड़ को मेरे चहरे पर घिसना शुरू कर दिया था। मैंने उसकी गाँड़ को पकड़ा और उसमें थूक मारकर उसे चूसने लगा। भाभी उत्तेजना के कारण अपनी गाँड़ झुलाने लगी थी।

कुछ समय बाद, मैंने भाभी को कुतिया बनाकर ज़मीन पर बिछाए कपड़े पर लेटा दिया। मैंने अपने लौड़े की नोक को भाभी की झाँटों से भरी चूत पर रखा और चूत की दरार पर रगड़ने लगा। अपनी दो उँगलियों को मैंने उसकी गाँड़ की छेद में घुसाकर अंदर-बाहर करने लगा।

मैंने उसकी झाँटों से भरी चूत पर अपना लौड़ा घिसकर अंदर घुसा दिया और भाभी की कमर पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से उसकी चुदाई करने लगा। भाभी चिल्लाकर मस्त हो रही थी।

मैं आगे झुक गया और भाभी की चूचियों को पकड़कर उन्हें दबाने लगा। जब उसकी गाँड़ मेरे लौड़े से टकराती थी, तब ‘पच-पच’ करके एक मधुर आवाज़ उत्पन्न हो रही थी।

मैं ज़मीन पर बिछाए कपड़े पर बैठ गया और भाभी को मेरे लौड़े पर बिठा दिया। उसको उसकी जाँघों से पकड़कर मैंने उसे उठाया और अपने लौड़े पर उछालने लगा। कुछ देर बाद, पैरों के बल बैठकर उसकी खुद मेरे लौड़े पर उछलने लगी थी।

कुछ देर बाद, मैं ज़मीन पर बिछाए कपड़े पर लेट गया। भाभी को मेरे ऊपर चढ़ाकर मैंने उसकी झाँटों से भरी गीली चूत पर अपना लौड़ा घिसना शुरू किया। उसने उत्तेजित होकर मेरे लौड़े को पकड़ा और अपनी चूत के अंदर घुसा दिया।

भाभी मेरे लौड़े पर अपनी गाँड़ उछाल-उछालकर चुदाई के मज़े ले रही थी। मैंने उसके हिलते हुए चूचियों को पकड़कर दबाया और उसको और उत्तेजित कर दिया। उसके निप्पल को पकड़कर खींचने पर वह ज़ोर से चीख़ने लगी थी। मैं भाभी की चीख़ों से उत्साहित होकर उसे अपने गले से लगा लिया और उसकी गाँड़ को पकड़कर चोदने लगा।

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मैं तेज़ी से अपने लौड़े को उसकी झाँटों से भरी चूत में घुसा रहा था। थोड़ी देर रुककर मैंने भाभी की गाँड़ की छेद में अपनी उँगली घुसाकर अंदर-बाहर करने लगा। चिल्लाते वक़्त उसके मुँह की गर्म साँसे मुझें बावला कर रही थी।

अपनी उँगली को गाँड़ की छेद से निकालकर मैंने उसे भाभी के मुँह में डाल दिया। उसने मेरी उँगली को अच्छे से चाटकर साफ़ किया। फिर मैं उसके मुँह में थूक मारकर सारा पानी पी गया।

मेरे लौड़े का पानी निकलने वाला था, इसलिए मैंने ज़ोर-ज़ोर से चुदाई करनी शुरू कर दी। कुछ समय बाद, मैंने अपने लौड़े के पानी को भाभी की झाँटों से भरी चूत में निकाल दिया।

अपना लौड़ा भाभी की चूत से निकालकर उसके मुँह में भर दिया। उसने मेरे लौड़े को चूस-चूसकर मेरे लौड़े का पानी निकाल दिया। सारा पानी पी जाने के बाद, भाभी उठकर अपने कपड़े पहनने लगी।

अपने कपड़े पहनकर वह मुझे ‘मादरचोद’ कहते हुए भाग गई। मैं जब ढाबे पर पहुँचा तब भाभी पतिव्रता का दिखावा करके गाड़ी में बैठे थे। कुछ समय बाद, जब भाभी का पति खाने का बिल चुकाने आया, तब मैंने उस वह वीडियो दिखा दिया।

भाभी के पति ने अपने गुस्से को काबू में रखा और गाड़ी में बैठकर चला गया। आगे भाभी और उसके प्रेमी का क्या हुआ, वह तो मुझे पता नहीं।

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